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शराब को लेकर पंजाब के चीफ सेक्रेटरी और मंत्रियों में तकरार

पंजाब में शनिवार को कैबिनेट मीटिंग में शराब नीति में संशोधन पर चर्चा होनी थी लेकिन मंत्रिमंडल की बैठक से पहले चीफ सेक्रेटरी के साथ मंत्रियों की बैठक में इस मुद्दे पर तकरार हो गई। राज्य के मुख्य सचिव करन अवतार सिंह शराब ठेकेदारों को कोरोना संकट में किसी तरह की छूट देने के खिलाफ थे। इस मुद्दे पर राज्य के वित्त मंत्री मनप्रीत बादल और उनके अन्य सहयोगी मंत्रियों से चीफ सेक्रेटरी की ठन गई। इसके बाच सभी मंत्री बैठक से अचानक निकल गए।

इस वजह से 2 बजे प्रस्तावित कैबिनेट मीटिंग को टालना पड़ा। इसके साथ ही शराब ठेकेदारों को राहत देने और उनके और सरकार के बीच गतिरोध खत्म करने के फैसले को भी टाल दिया गया। मंत्रियों और चीफ सेक्रेटरी की मीटिंग में मौजूद एक सूत्र ने बताया कि समस्या तब उत्पन्न हुई जब चीफ सेक्रेटरी ने बैठक में मंत्रियों को बताया कि कोरोना वायरस की वजह से कर्फ्यू अवधि के दौरान कुल 37 दिनों के लिए शराब ठेकेदारों को लाइसेंस फीस में छूट दी गई है।

ये सुनते ही वहां मौजूद तकनीकि शिक्षा मंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने आपत्ति जताई और कहा कि अब तो कैबिनेट मीटिंग की कोई जरूरत ही नहीं है क्योंकि सरकारी खजाने की कीमत पर आबकारी नीति में संशोधन करने का फैसला तो पहले ही लिया जा चुका है। इसके बाद मंत्री ने पूछा कि मंत्रिमंडल की सलाह के बिना किसी नीति को अंतिम रूप कैसे दिया जा सकता है?

वित्त मंत्री मनप्रीत बादल ने भी प्रस्तावित राहत पर आपत्ति जताते हुए कहा, “मुख्य सचिव का पलटवार केवल चन्नी के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे मंत्रिमंडल के लिए है।” उन्होंने कहा कि राज्य का उत्पाद शुल्क पिछले साल लक्ष्य को पूरा नहीं कर सका और 700 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। उन्होंने पूछा है कि अगर राहत दिया गया तो वो बतौर वित्त मंत्री राज्य को कैसे चलाएंगे? इस पर मुख्य सचिव ने भी दलील दी और कहा कि वो भी राज्य के एक जिम्मेदार अफसर हैं। इतना सुनते ही मनप्रीत बादल मीटिंग में खड़े हो गए और बाहर निकल गए। थोड़ी ही देर में चन्नी और अन्य मंत्री भी बैठक से निकल गए।

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